मधुबनी, 13 जून।
कभी कागज और रंगों तक सीमित रहने वाली मधुबनी पेंटिंग आज कई परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन रही है। इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल हैं रहिका प्रखंड की प्रीति कुमारी, जिन्होंने अपनी कला को पहचान देने के साथ-साथ उसे रोजगार का जरिया बनाकर कई महिलाओं के जीवन में भी खुशहाली लाई है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली 3.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता ने प्रीति के सपनों को उड़ान दी। बचपन से ही मधुबनी पेंटिंग में रुचि रखने वाली प्रीति ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाय अपनी कला को ही उद्यम में बदलने का फैसला किया। वर्ष 2018 में मिली सरकारी सहायता से उन्होंने मधुबनी पेंटिंग इकाई की स्थापना की और आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ाया।
हालांकि यह सफर आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें प्रशिक्षित कारीगरों की कमी, कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादों के लिए बाजार खोजने जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, गुणवत्ता और नवाचार के दम पर उन्होंने अपने उत्पादों को पहचान दिलाई। आज उनकी बनाई मधुबनी पेंटिंग की मांग बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों तक पहुंच चुकी है।
प्रीति की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने अपने उद्यम से करीब 10 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। इससे इन महिलाओं के परिवारों की आय बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। गांव की महिलाएं अब आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में भागीदारी निभा रही हैं।
प्रीति का सपना अब और बड़ा है। वे मधुबनी पेंटिंग को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना चाहती हैं। इसके लिए वे अपने व्यवसाय का विस्तार करने, आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त करने और नए बाजारों से जुड़ने की दिशा में काम कर रही हैं।
युवाओं को संदेश देते हुए प्रीति कहती हैं कि यदि लगन और आत्मविश्वास हो तो सरकारी योजनाएं सफलता का मजबूत आधार बन सकती हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी तलाशने के बजाय उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया है।
प्रीति कुमारी की कहानी यह साबित करती है कि सही दिशा, मेहनत और सरकारी सहयोग मिलने पर एक छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है। उनकी उपलब्धि न केवल मधुबनी जिले बल्कि पूरे बिहार के युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
