मधुबनी, 03 जून 2026।
मधुबनी जिले के बिस्फी प्रखंड अंतर्गत सोहास पंचायत के केरवार गांव में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से पांच मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य बच्चे को ग्रामीणों की तत्परता से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अधिकारियों को घटनास्थल पर भेजा और राहत एवं सहायता कार्यों की निगरानी स्वयं शुरू कर दी। साथ ही उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) बेनीपट्टी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) बेनीपट्टी को घटना की विस्तृत जांच का निर्देश दिया है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा कि यह बेहद दुखद और संवेदनशील घटना है। प्रशासन इसकी गहन जांच कराएगा और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मृतक बच्चों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन इस कठिन समय में पूरी मजबूती के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है।
पांच घंटे के भीतर परिजनों को मिली सहायता राशि
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के तहत मृत पांचों बच्चों के निकटतम परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराई। प्रशासनिक तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के महज पांच घंटे के भीतर सहायता राशि का भुगतान सुनिश्चित कर दिया गया।
स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों ने प्रशासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन ने तेजी से मदद पहुंचाकर मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया है।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन
घटना की जानकारी प्राप्त होते ही जिलाधिकारी ने अपर समाहर्ता (आपदा), जिला आपदा प्रभारी पदाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी बेनीपट्टी को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा राहत और सहायता कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया।
प्रशासन के अनुसार हादसे में कुल छह बच्चे पानी में डूब गए थे। ग्रामीणों के साहसिक प्रयासों से एक बच्चे को जीवित बाहर निकाल लिया गया, जिसका इलाज जारी है। हालांकि पांच बच्चों को बचाया नहीं जा सका।
बरसात में बढ़ जाता है खतरा, सतर्क रहने की जरूरत
घटना के बाद जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जिलेवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में तालाब, पोखर, नदी, नहर और जलभराव वाले क्षेत्रों में पानी का स्तर बढ़ने से डूबने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता है।
उन्होंने सभी मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से अपने-अपने क्षेत्रों में गहरे गड्ढों, तालाबों, पोखरों और अन्य खतरनाक जलस्रोतों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाने, बैरिकेडिंग कराने तथा जन-जागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
“एक छोटी सी लापरवाही छीन सकती है कई घरों की खुशियां”
जिलाधिकारी ने कहा कि डूबने जैसी घटनाओं की रोकथाम केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, जीविका समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “एक छोटी सी लापरवाही कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है। सावधानी, जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ही ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।”
फिलहाल केरवार गांव में मातम पसरा हुआ है। मासूम बच्चों की असमय मौत से पूरा इलाका शोक में डूबा है, वहीं प्रशासन घटना की जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयासों में जुट गया है।
