मधुबनी जिला अंतर्गत सकरी में जनाब शमशाद साहब के विशाल आवास पर “इस्लाह-ए-मुआशरा बराए ख़वातीन” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जमीयत उलेमा मधुबनी की ओर से किया गया, जिसकी अध्यक्षता मौलाना मुफ़्ती अबूज़र कासमी ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत मरकज़ अल-सफा सकरी की एक छात्रा द्वारा कुरआन पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद हम्द व नात पेश की गई।
मुफ़्ती महताब कासमी ने जमीयत उलेमा मधुबनी का संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि हिंदुस्तान में यही एक ऐसी तंजीम है जो ज़मीनी स्तर पर काम कर रही है और मुसलमानों के मसलों को नीचे से लेकर उच्च स्तर तक मजबूती के साथ उठाती रहती है।
इसके बाद मौलाना मोहम्मद मुर्तज़ा कासमी ने अपने संबोधन में कहा कि आज इल्म की कमी नहीं, बल्कि अमल की कमी है। हम सभी जानते हैं कि कौन-से कार्यों से अल्लाह तआला खुश होते हैं और किन कार्यों से नाराज़। इसलिए मौजूदा हालात में ज़रूरी है कि हम अच्छे अमल को अपनी जिंदगी में लाएं और बुरे अमल से बचने की कोशिश करें।
अंत में मौलाना मुफ़्ती अबूज़र कासमी ने अपने बयान में हज़रत फ़ातिमा रज़ि. और इमाम बुख़ारी की वालिदा के वाक़ियात का ज़िक्र करते हुए कहा कि अगर हमारी मां और बहनें उनकी तरह जिंदगी गुजारना शुरू कर दें तो घर जन्नत नुमा बन जाएगा। उन्होंने कहा कि परेशानियां चाहे जैसी भी हों, सब्र से काम लेना चाहिए और किसी भी हाल में अल्लाह की नाफरमानी नहीं होनी चाहिए। अपनी बच्चियों को दीन की तालीम से आरास्ता करें और पर्दे के लिए शरीयत के मुताबिक नक़ाब और कपड़ों का इस्तेमाल करें।
उन्होंने कहा कि अगर हम इन बातों पर अमल शुरू कर दें तो अल्लाह तआला की मदद हमारे साथ होगी। कार्यक्रम का समापन मौलाना मुफ़्ती अबूज़र कासमी की दुआ के साथ हुआ।
