मधुबनी | 30 अप्रैल 2026
बाल श्रम उन्मूलन को लेकर मधुबनी जिले में एक अहम कदम उठाया गया है। बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन ने व्यापक जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत करते हुए जागरूकता रथ को रवाना किया। इस रथ को उप विकास आयुक्त सुमन कुमार साह ने जिला परिषद परिसर (DRDA) स्थित श्रम अधीक्षक कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह जागरूकता रथ जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घूमकर लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना न केवल गलत है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत बाल श्रम करना दंडनीय अपराध है। किसी भी दुकान, प्रतिष्ठान या संस्था में बाल श्रम पाए जाने पर संबंधित नियोजक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। इसके तहत ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना और दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार दोषी नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक ₹20,000 की अतिरिक्त राशि वसूलने का भी प्रावधान है, जिसका उपयोग बाल श्रमिकों के पुनर्वास में किया जाता है।
जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे बाल श्रम से जुड़ी किसी भी जानकारी को तुरंत संबंधित विभाग तक पहुंचाएं, ताकि समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान न केवल जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगा।
इस मौके पर श्रम विभाग के अधिकारी, डेटा एंट्री ऑपरेटर, कार्यालय कर्मी, सर्वेक्षण संस्थान के प्रतिनिधि और ग्राम विकास युवा ट्रस्ट के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने बाल श्रम के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
