बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के जरिए दिल्ली की राजनीति में जाने की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो करीब दो दशकों से बिहार की सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार का सक्रिय मुख्यमंत्री कार्यकाल खत्म हो सकता है और राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू होगा। �
सूत्रों के मुताबिक इस फैसले के पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। एक तरफ भाजपा और जदयू के बीच नए सत्ता समीकरण की चर्चा है, तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भी हलचल है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद बिहार में मुख्यमंत्री पद पर भाजपा का चेहरा सामने आ सकता है। �
क्या जेडीयू में टूट का खतरा?
नीतीश कुमार जदयू के सबसे बड़े चेहरे रहे हैं। ऐसे में उनके दिल्ली जाने से पार्टी के भीतर कई खेमे बनने की आशंका जताई जा रही है। कुछ नेता चाहते हैं कि नीतीश ही बिहार की कमान संभाले रखें, जबकि दूसरा गुट नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताया जा रहा है। �
बेटे निशांत की एंट्री का प्लान
इसी बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा भी तेज है। पहले खबर थी कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन अब कहा जा रहा है कि वे बिहार की राजनीति से ही अपनी शुरुआत कर सकते हैं और जदयू की नई पीढ़ी का चेहरा बन सकते हैं। �
भाजपा का अगला कदम क्या?
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस मौके को बिहार की सत्ता में अपनी भूमिका मजबूत करने के रूप में देख रही है। अगर नीतीश दिल्ली जाते हैं तो मुख्यमंत्री पद भाजपा के खाते में जा सकता है, जबकि जदयू को सरकार में सहयोगी भूमिका मिल सकती है। �
बिहार की राजनीति में नया दौर
करीब 20 साल तक बिहार की सत्ता पर प्रभाव रखने वाले नीतीश कुमार का दिल्ली जाना केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है। इससे न केवल जदयू का भविष्य तय होगा, बल्कि भाजपा और विपक्षी दलों की रणनीति भी बदल सकती है। �
