पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष का दावा— वर्षों के संघर्ष और आंदोलनों का परिणाम है मधुबनी में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना
मधुबनी: मधुबनी जिला मुख्यालय के समीप केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होने के बाद राजनीतिक गलियारों में श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। इस बीच जिला कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा है कि जब केंद्रीय विद्यालय को झंझारपुर स्थानांतरित किए जाने की चर्चा चल रही थी, तब अधिकांश जनप्रतिनिधि पूरी तरह मौन थे। आज स्वीकृति मिलने के बाद वही लोग इसका श्रेय लेने में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मधुबनी में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना का प्रयास कोई नया विषय नहीं है। उनके अनुसार इसकी शुरुआत तत्कालीन सांसद एवं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री डॉ. शकील अहमद के कार्यकाल में हुई थी। उस समय कई संभावित स्थलों का निरीक्षण किया गया, लेकिन बिहार सरकार की ओर से भूमि उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद रामकृष्ण महाविद्यालय और फिर वाटसन हाई स्कूल में विद्यालय शुरू करने का प्रयास किया गया, किंतु आवश्यक अनुमति नहीं मिलने से मामला अधर में रह गया।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि इस मुद्दे को जीवित रखने का काम बाद में मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने किया। उन्होंने दावा किया कि जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने भी जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को स्मारपत्र सौंपकर मधुबनी जिला मुख्यालय में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग उठाई। उस समय भी किसी बड़े राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि ने इस विषय पर गंभीर पहल नहीं की।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले जब केंद्रीय विद्यालय को झंझारपुर ले जाने की चर्चा तेज हुई, तब उन्होंने मधुबनी के बुद्धिजीवियों एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर आंदोलन का बिगुल फूंका। इसके बाद “मधुबनी विकास संघर्ष समिति” का गठन किया गया और जिला मुख्यालय के आसपास लगभग एक दर्जन संभावित भूमि का प्रस्ताव जिला प्रशासन को सौंपा गया। उनका दावा है कि जिलाधिकारी ने इन प्रस्तावों को बिहार सरकार को भेजने का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया। इस दौरान मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने भी लगातार धरना-प्रदर्शन किया।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने मधुबनी और झंझारपुर—दोनों स्थानों के लिए केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति दी, तब इस निर्णय का स्वागत किया गया। साथ ही लगातार यह मांग रखी गई कि सबसे पहले जिला मुख्यालय के समीप विद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए और उसके बाद झंझारपुर में विद्यालय खोला जाए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिला प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि स्थायी भवन बनने तक केंद्रीय विद्यालय का संचालन अस्थायी रूप से वाटसन हाई स्कूल से किया जाएगा।
अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले संगठनों और लोगों के योगदान को नजरअंदाज कर अब कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा श्रेय लेने की कोशिश करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि इस उपलब्धि का वास्तविक श्रेय उन लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने लगातार आवाज उठाई, आंदोलन किया और इस मुद्दे को जीवित रखा।
