Tuesday, June 9, 2026
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पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान की 10वीं वर्षगांठ पर खजौली में विशेष स्वास्थ्य शिविर, 150 से अधिक गर्भवती महिलाओं की हुई जांच

खजौली, मधुबनी। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खजौली में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस विशेष अभियान के तहत 150 से अधिक गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर उनकी प्रसव-पूर्व (एंटीनेटल) जांच की गई तथा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया गया।
शिविर का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान करना, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना था। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों और कर्मियों ने पूरे दिन सक्रिय रहकर लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं।

इसी दौरान जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) पंकज कुमार ने सीएचसी खजौली का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल के ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, प्रसव कक्ष, दवा वितरण केंद्र, पंजीकरण काउंटर तथा विभिन्न वार्डों का बारीकी से जायजा लिया। अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन, साफ-सफाई और कर्मियों की तत्परता को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण के बाद डीपीएम पंकज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सीएचसी खजौली की टीम जिस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में खजौली स्वास्थ्य केंद्र का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को इसी प्रकार गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया।

गर्भवती महिलाओं की हुई व्यापक स्वास्थ्य जांच
शिविर में एमओआईसी डॉ. ज्योतिंद्र नारायण के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की। टीम में डॉ. शाहिद इकबाल, डॉ. गणेश विद्यार्थी तथा डॉ. अंजली कुमारी शामिल रहे। जांच के दौरान महिलाओं का ब्लड प्रेशर, वजन, हीमोग्लोबिन स्तर, रक्त शर्करा, यूरिन टेस्ट समेत अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए।

स्वास्थ्य जांच के दौरान हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की विशेष रूप से पहचान की गई। ऐसे मामलों में संबंधित महिलाओं को विशेष चिकित्सकीय परामर्श दिया गया तथा नियमित फॉलोअप की सलाह दी गई। वहीं खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित महिलाओं को एफसीएम (Ferric Carboxymaltose) इंजेक्शन भी लगाया गया, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।

लैब, काउंसलिंग और प्रबंधन व्यवस्था रही सक्रिय
पैथोलॉजी लैब में लैब टेक्नीशियन राघवेंद्र कुमार और मोहम्मद इस्मतुल्लाह गुलाब ने जांच प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित ढंग से संचालित किया। एएनएम रानी कुमारी एवं उपस्थित जीएनएम कर्मियों ने पंजीकरण, जांच और लाभार्थियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
काउंसलर पिंकू कुमारी ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित पोषण, आयरन एवं कैल्शियम की नियमित खुराक, प्रसव पूर्व सावधानियों तथा संस्थागत प्रसव के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए भी प्रेरित किया। शिविर के सफल संचालन में बीएम अर्चना भट्ट एवं अकाउंटेंट पल्लवी कुमारी ने भी सक्रिय योगदान दिया तथा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में सहयोग किया।

लाभार्थियों को दी गई नि:शुल्क दवाएं और अल्पाहार
स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद सभी गर्भवती महिलाओं को आवश्यक नि:शुल्क दवाएं वितरित की गईं। इसके साथ ही उन्हें पोषण युक्त अल्पाहार भी उपलब्ध कराया गया। शिविर में शामिल महिलाओं ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक माह आयोजित होने वाला प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में काफी मददगार साबित हो रहा है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण अभियान
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी गर्भवती महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण प्रसव-पूर्व स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना, जोखिमपूर्ण गर्भधारण की समय पर पहचान करना तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।

अभियान की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर खजौली में आयोजित यह विशेष शिविर स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता और सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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