मधुबनी | 23 अप्रैल 2026
मधुबनी के सामाजिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) मधुबनी के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं प्रख्यात दवा व्यवसायी महेश प्रसाद का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे मधुबनी जिले में शोक की लहर दौड़ गई है।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने बुधवार को दिल्ली में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिजनों, शुभचिंतकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों में गहरा शोक व्याप्त हो गया।
️ समाज सेवा में सक्रिय और समर्पित व्यक्तित्व
मधुबनी शहर के कारक मार्ग निवासी स्वर्गीय महेश प्रसाद लंबे समय तक विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े रहे और जिला अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे न केवल एक सफल व्यवसायी थे, बल्कि एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते थे।
समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख-दुख में शामिल रहना उनकी पहचान थी। उनकी कार्यशैली और समर्पण ने उन्हें जन-जन के बीच एक विशेष स्थान दिलाया।
सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी
महेश प्रसाद अपने सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव के कारण समाज में अत्यंत लोकप्रिय थे।
उनका व्यवहार और लोगों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण उन्हें दूसरों से अलग बनाता था।
वे हमेशा लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे, जिसके कारण समाज में उनकी एक अलग पहचान बनी हुई थी।
वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार
परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय महेश प्रसाद का अंतिम संस्कार वाराणसी में परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में किया जाएगा।
उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने जताया शोक
उनके निधन पर भाजपा जिला मीडिया प्रभारी सह युवा नेता मनोज कुमार मुन्ना ने गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि:
“महेश प्रसाद एक समर्पित समाजसेवी और संगठन के सच्चे स्तंभ थे। उनका जीवन पूरी तरह समाज सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके निधन से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई करना अत्यंत कठिन है।”
इसके अलावा, कई सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यावसायिक संगठनों के लोगों ने भी उनके निधन पर शोक-संवेदना व्यक्त की है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।
समाज के लिए अपूरणीय क्षति
महेश प्रसाद का निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
उनका योगदान और समाज के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
