मधुबनी सहित देशभर में आज मेडिकल दुकानदारों ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ एकदिवसीय बंदी रखी। यह बंदी All India Organisation of Chemists and Druggists के आह्वान पर की गई, जिसमें दवा दुकानदारों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिए जा रहे भारी डिस्काउंट का विरोध जताया। बंदी के दौरान अधिकांश मेडिकल दुकानें बंद रहीं, हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए मधुबनी जिले में करीब 25 से 27 दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई। शहर में केवल दो प्रमुख मेडिकल स्टोर खुले रहे, ताकि मरीजों को आवश्यक दवाइयां मिलती रहें।
तिलक चौक स्थित Uma Medical Hall के संचालक प्रदीप कुमार महतो ने बताया कि दुकानदारों की नाराज़गी ऑनलाइन दवा बिक्री से नहीं, बल्कि वहां दिए जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट से है। उन्होंने कहा कि ऑफलाइन मेडिकल दुकानदारों को कंपनियों की ओर से दवाइयों पर लगभग 20 से 22 प्रतिशत तक ही मार्जिन मिलता है, जबकि ऑनलाइन कंपनियां 25 से 30 प्रतिशत तक की छूट देकर दवाइयां बेच रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्थानीय दुकानदारों को सीमित मार्जिन मिलता है और उन्हें जीएसटी बिल पर पूरी खरीदारी करनी पड़ती है, तब ऑनलाइन कंपनियां इतना अधिक डिस्काउंट कैसे दे पा रही हैं। उनका कहना है कि ऑफलाइन दुकानों को दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, फार्मासिस्ट की नियुक्ति और अन्य कई खर्च उठाने पड़ते हैं। मेडिकल नियमों के अनुसार फार्मासिस्ट रखना अनिवार्य है, जिसका अलग खर्च आता है। इसके बावजूद दुकानदार सीमित मुनाफे में कारोबार चला रहे हैं।
प्रदीप कुमार महतो ने बताया कि अक्सर ग्राहक मेडिकल दुकानों पर आकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए 25 से 30 प्रतिशत तक छूट की मांग करते हैं। लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए इतनी छूट देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों के भारी डिस्काउंट के कारण स्थानीय मेडिकल दुकानों की बिक्री काफी प्रभावित हुई है और छोटे दुकानदार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
मेडिकल दुकानदारों का कहना है कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। या तो ऑनलाइन कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जाए या फिर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों कारोबारियों के लिए समान नियम और समान डिस्काउंट नीति लागू की जाए। दुकानदारों का मानना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो छोटे मेडिकल व्यवसायियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
बंदी के दौरान कई जगहों पर मेडिकल दुकानदारों ने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन भी किया। दुकानदारों का कहना है कि वे मरीजों की सुविधा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बाजार में समान प्रतिस्पर्धा जरूरी है। उनका मानना है कि अगर ऑनलाइन कंपनियों को मनमानी छूट देने की अनुमति मिलती रही तो आने वाले समय में पारंपरिक मेडिकल दुकानें बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएंगी।
मधुबनी जिले में बंदी के बावजूद इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखा गया। शहर में खुली दुकानों पर जरूरतमंद मरीजों की भीड़ देखी गई। दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य आम लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी समस्याएं पहुंचाना है।
मेडिकल दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
