मधुबनी। जिले के बाबूबरही प्रखंड के बलिराजगढ़ में हुई संवेदनशील घटना के दौरान डीएम आनंद शर्मा ने जिस धैर्य, संयम और समझदारी के साथ हालात को संभाला, उसकी जिले के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने सराहना की है। बुधवार को जिले के चिकित्सा, शिक्षा, समाजसेवा, पत्रकारिता, कानून और व्यवसाय जगत से जुड़े लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने समाहरणालय पहुंचकर डीएम आनंद शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया और बलिराजगढ़ की घटना के दौरान उनकी कार्यशैली की प्रशंसा की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में प्रशासनिक अधिकारी के धैर्य और समझदारी की असली परीक्षा होती है। डीएम आनंद शर्मा ने कठिन हालात में भी अपना धैर्य बनाए रखा। उन्होंने धरना दे रहे लोगों से सीधे बातचीत की, उनकी समस्याओं और भावनाओं को सुना और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
लोगों ने कहा कि डीएम ने केवल कानून-व्यवस्था संभालने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि पीड़ित परिवार के दर्द को भी समझा। उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। साथ ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आम लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने का निर्देश दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि डीएम की इस कार्यशैली से प्रशासन और आम लोगों के बीच भरोसा कायम करने में मदद मिली है। एक अच्छे अधिकारी की पहचान यही है कि वह मुश्किल समय में भी लोगों की बात सुने और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान की दिशा में काम करे।

इस मौके पर रीजनल सेकेंडरी स्कूल के निदेशक डॉ. आरएस पांडेय, डॉ. डीके झा, डॉ. कुणाल कौशल, डॉ. सुमन, अनिरुद्ध प्रताप चौधरी, छाया मिश्रा, काजी, कमलदेव यादव, टुन्नाश्री, डॉ. नीरज, कर्ण, गुलाब, मृत्युंजय, रंजीत, नीतीश और राघव सहित कई समाजसेवी, शिक्षाविद, चिकित्सक, पत्रकार, अधिवक्ता और व्यवसायी मौजूद थे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि बलिराजगढ़ जैसी संवेदनशील घटना के दौरान डीएम आनंद शर्मा ने जिस धैर्य और जिम्मेदारी के साथ काम किया, वह सराहनीय है। उनकी कार्यशैली दूसरे जिलों के अधिकारियों के लिए भी एक अच्छी मिसाल है।
