Tuesday, September 1, 2026
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6 साल के आदित्य के लिए फरिश्ता बने SBGS के डायरेक्टर डॉ. विजय रंजन, गोद लेने का किया ऐलान; पढ़ाई से कानूनी लड़ाई तक उठाएंगे जिम्मेदारी

फूलपरास/मधुबनी। जिस उम्र में छह साल के मासूम आदित्य के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में वह पटना की तपती सड़क पर न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठा था। परिवार की परेशानियों और न्याय की लड़ाई के बीच मासूम आदित्य की तस्वीरों ने लोगों को भावुक कर दिया।

इसी बीच मधुबनी जिले से इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सराहनीय पहल सामने आई है। फूलपरास स्थित संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल (SBGS) के डायरेक्टर डॉ. विजय रंजन ने आदित्य को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने आदित्य की शिक्षा, देखभाल और भविष्य को संवारने के साथ-साथ उसकी कानूनी लड़ाई में भी सहयोग करने की जिम्मेदारी लेने की बात कही है।

आदित्य के भविष्य को संवारने की पहल
डॉ. विजय रंजन की इस पहल को सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक बच्चे के भविष्य की जिम्मेदारी उठाने के रूप में देखा जा रहा है। छह साल की उम्र में जिस बच्चे को स्कूल में पढ़ना और खेलना चाहिए, उसके संघर्ष को देखते हुए डॉ. विजय रंजन ने आगे बढ़कर उसका साथ देने का फैसला किया है।

उनकी पहल से आदित्य और उसके परिवार को मुश्किल दौर में एक नई उम्मीद मिली है। शिक्षा और बेहतर भविष्य के साथ कानूनी स्तर पर भी सहयोग मिलने से परिवार को राहत की उम्मीद जगी है।

फूलपरास में स्थित है संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल
संस्कार भारती ग्लोबल स्कूल (Sanskar Bharti Global School) मधुबनी जिले के फूलपरास में स्थित एक सह-शिक्षा, अंग्रेजी माध्यम और CBSE से संबद्ध डे एवं बोर्डिंग स्कूल है। स्कूल में नर्सरी/केजी से लेकर सीनियर सेकेंडरी यानी कक्षा 12 तक की पढ़ाई होती है।

स्कूल लौकहा-घोघरडीहा रोड पर, सब-डिवीजन कार्यालय के पास, फूलपरास, मधुबनी, बिहार में स्थित है। वर्ष 2009-10 में स्थापित इस विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ बेहतर संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से जोड़ना है।
स्कूल में स्मार्ट डिजिटल क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर एवं कोडिंग लैब, खेल परिसर और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इंसानियत की मिसाल बनी पहल
आदित्य की कहानी ने जहां व्यवस्था और समाज के सामने कई सवाल खड़े किए हैं, वहीं डॉ. विजय रंजन की पहल ने यह संदेश दिया है कि मुश्किल परिस्थितियों में किसी बच्चे का हाथ थामकर उसके भविष्य को नई दिशा दी जा सकती है।

आदित्य के लिए यह पहल केवल आज की मदद नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद बनकर सामने आई है। डॉ. विजय रंजन के इस कदम की क्षेत्र में सराहना हो रही हैl 

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