Tuesday, April 28, 2026
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मधुबनी ने रचा इतिहास: पांडुलिपि डिजिटाइजेशन में बिहार में नंबर-1, 3.96 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे पूरा

मधुबनी | 28 अप्रैल 2026

बिहार के मधुबनी जिले ने सांस्कृतिक संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पांडुलिपि सर्वेक्षण एवं डिजिटाइजेशन अभियान में मधुबनी पूरे बिहार में पहले स्थान पर पहुंच गया है। राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई, जहां जिलावार प्रगति रिपोर्ट का आकलन किया गया।

राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया गया कि मधुबनी जिले में अब तक 3 लाख 96 हजार 487 पांडुलिपियों का सत्यापित एवं स्वीकृत सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जो बिहार के सभी जिलों में सबसे अधिक है। इस उपलब्धि के साथ मधुबनी ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

दूसरे स्थान पर गया जिला रहा, जहां 1 लाख 11 हजार 398 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया।
सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में मधुबनी बना मिसाल
मधुबनी जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, मिथिला कला, साहित्य और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहा है। अब पांडुलिपियों के संरक्षण में शीर्ष स्थान प्राप्त कर जिले ने अपनी पहचान को और मजबूत किया है।

यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि मधुबनी की गहरी ज्ञान परंपरा, साहित्यिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण भी है।

राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
वर्चुअल माध्यम से आयोजित राज्यस्तरीय बैठक में पांडुलिपि सर्वेक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

पांडुलिपियों की खोज एवं पहचान
सूचीकरण एवं वर्गीकरण
सत्यापन एवं स्वीकृति प्रक्रिया
डिजिटाइजेशन कार्य की गति
आम जनता की भागीदारी
शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं का सहयोग
इन सभी मानकों पर मधुबनी जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके कारण उसे पहला स्थान मिला।

पांडुलिपियां क्या होती हैं और क्यों हैं महत्वपूर्ण?

पांडुलिपियां वे हस्तलिखित दस्तावेज होती हैं, जो सामान्यतः 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी होती हैं। इनमें इतिहास, संस्कृति, धर्म, साहित्य और विज्ञान से जुड़ी अमूल्य जानकारियां सुरक्षित रहती हैं।
इनमें शामिल हो सकते हैं:
प्राचीन धार्मिक ग्रंथ
वेद, पुराण, शास्त्र
साहित्यिक रचनाएं
लोककथाएं एवं पारंपरिक ज्ञान
राजकीय दस्तावेज
चिकित्सा एवं ज्योतिष संबंधी लेखन
सामाजिक एवं ऐतिहासिक अभिलेख
ये दस्तावेज हमारी सभ्यता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर माने जाते हैं।
“ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत चल रहा राष्ट्रीय अभियान
भारत सरकार द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत देशभर में पांडुलिपियों को खोजने, सुरक्षित रखने और डिजिटाइज करने का अभियान चलाया जा रहा है।

इस मिशन का उद्देश्य है:

दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना
शोधकर्ताओं एवं छात्रों को अध्ययन सुविधा देना
सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना
चोरी, नष्ट होने या क्षति से बचाना
डिजिटाइजेशन के माध्यम से सदियों पुरानी धरोहर को आधुनिक तकनीक से सुरक्षित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अपील
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताते हुए जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने जिलेवासियों से अपील की कि वे इस अभियान से जुड़ें और अपने पास उपलब्ध पुरानी पांडुलिपियों की जानकारी प्रशासन को दें।

उन्होंने कहा:
“मधुबनी की यह सफलता सभी नागरिकों, संस्थानों और प्रशासन के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मंदिर, मठ, पुस्तकालय या संस्था के पास पुरानी पांडुलिपि है, तो उसे चिन्हित कर डिजिटाइजेशन में सहयोग करें।”
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐसे जुड़ सकते हैं अभियान से
यदि आपके पास भी कोई पुरानी पांडुलिपि, दस्तावेज या हस्तलिखित ग्रंथ है, तो आप इन तरीकों से सहयोग कर सकते हैं:

✅ “ज्ञान भारतम्” ऐप डाउनलोड करें
✅ पांडुलिपि की जानकारी अपलोड करें
✅ जिला प्रशासन से संपर्क करें
✅ स्थानीय अधिकारियों को सूचना दें
✅ अपने गांव/क्षेत्र में उपलब्ध पुरानी धरोहरों की जानकारी साझा करें
संपर्क नंबर: 9931747796
(जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी)
सामूहिक प्रयास से मिली सफलता

मधुबनी की इस उपलब्धि में कई वर्गों का योगदान रहा है:

जिला प्रशासन
शिक्षा संस्थान
शोधकर्ता एवं विद्वान
सामाजिक संगठन
धार्मिक संस्थान
आम नागरिक
सभी के सहयोग से यह अभियान एक सफल जनभागीदारी मॉडल बनकर सामने आया है।
बिहार के लिए प्रेरणा बना मधुबनी
मधुबनी जिले की यह उपलब्धि अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। इससे यह साबित हुआ है कि यदि प्रशासन और जनता मिलकर काम करें तो ऐतिहासिक विरासत को बचाया जा सकता है।अब आवश्यकता है:
हर नागरिक जागरूक बने
पुरानी धरोहरों को पहचानें
उन्हें सुरक्षित रखें
डिजिटाइजेशन अभियान से जुड़ें

निष्कर्ष

पांडुलिपि डिजिटाइजेशन में बिहार में पहला स्थान प्राप्त कर मधुबनी ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और विरासत को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मधुबनी ने दिखा दिया है कि अपनी जड़ों से जुड़कर विकास की नई मिसाल कायम की जा सकती है।
“आपकी एक पहल, हमारी विरासत की सुरक्षा”

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