Tuesday, March 10, 2026
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संदीप यूनिवर्सिटी शिजोल में फार्मेसी की पढ़ाई शुरू, B-Pharma और D-Pharma को मिली PCI से मंजूरी

 

मधुबनी/शिजोल।(निदा परवीन)

मिथिलांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि सामने आई है। संदीप विश्वविद्यालय शिजोल परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानकारी दी कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) से विश्वविद्यालय को बैचलर ऑफ फार्मेसी (B-Pharma) और डिप्लोमा इन फार्मेसी (D-Pharma) कोर्स संचालित करने की मान्यता मिल गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन दोनों कार्यक्रमों की पढ़ाई शुरू होगी।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले आयोजित कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के चेयरमैन ने मंच से ही इस उपलब्धि की घोषणा की थी। अब PCI से औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद संदीप यूनिवर्सिटी में “स्कूल ऑफ फार्मेसी” की शुरुआत की जा रही है, जो विश्वविद्यालय का आठवां स्कूल होगा।

प्रबंधन के अनुसार B-Pharma चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम है, जबकि D-Pharma दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है, जिसे 12वीं के बाद किया जा सकता है। सीटों की बात करें तो B-Pharma में 100 सीटें और D-Pharma में 60 सीटें निर्धारित की गई हैं।

विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2017 में हुई थी और 2018 से यहां लगातार नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट स्टडीज, स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, स्कूल ऑफ लॉ, स्कूल ऑफ एजुकेशन तथा स्कूल ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंसेज जैसे सात स्कूल संचालित हो रहे हैं। अब फार्मेसी की पढ़ाई शुरू होने से यह संख्या आठ हो गई है।

प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि इन कोर्सों में नामांकन संदीप यूनिवर्सिटी जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (SUJET) के माध्यम से होगा। यह प्रवेश परीक्षा 26 अप्रैल को आयोजित की जाएगी, जो पूरे बिहार में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित होगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना है। विद्यार्थियों से नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहकर पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील भी की गई।

प्रबंधन के अनुसार चेयरमैन संदीप झा और कुलाधिपति नित्यानंद झा के प्रयासों से स्थापित यह विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। फार्मेसी संस्थान की शुरुआत को मेडिकल एजुकेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब फार्मेसी की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

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